एक महिला को जिंदा चीर देना क्या भाई चारा साबित करता है! रिपोर्ट मुकेश राणा!

 


स. संपादक शिवाकांत पाठक उत्तराखंड!



(बहिन तुम्हे बचा नहीं सके गुस्से में कांप रहे थे लोग)


(रोंगटे खड़े कर देने वाली सत्य घटना)


आपके साहस को कोटि कोटि नमन

(क्या कर रही थी उस समय सरकार)


डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री की फिल्म कश्मीर फाइल्स (Kashmir Files) की रिलीज़ के बाद कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार का मामला एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है. आतंकवादियों के डर से अपने घर. अपनी यादें कश्मीर में छोड़कर आने वाले लोगों ने जब ये फिल्म देखी वो रो पड़े. फिल्म में एक कहानी गिरिजा टिक्कू (Story Of Girija Tickoo) की भी दिखाई गई है. 11 जून 1990 को रोंगटे खड़े कर देने वाला वो दिन जिसे भूला नहीं जा सकता. गिरजा टिक्कू जो एक स्कूल में लैब असिसटेंट का काम करती थीं उस दिन अपनी सैलरी लेने गई थीं. जिसके बाद वो अपनी एक दोस्त से मिलने चली जाती हैं. आतंकी काफी समय से गिरजा पर नज़र रखे हुए थे. बस फिर क्या था आतंकियों ने गिरिजा का अपहरण कर लिया. गांव के लोग जानते थे ये सब किसने किया है. लेकिन डर के कारण कुछ बोल नहीं पाए.??


फिर आतंकियों ने गिरिजा के साथ ऐसा कुछ किया जिसे सुनकर भी रुह कांप जाती है. उन्होंने गिरिजा के साथ सामूहिक बलात्कार ही नहीं किया बल्कि उसे जिंदा आरी से काट दिया. ऐसा करके वो हिंदुओं के बीच डर का मौहाल पैदा करना चाहते थे.


द कश्मीर फाइल्स 1990 में कश्मीरी हिन्दुओं पर घाटी में हुए अत्याचार की सच्ची कहानी है. यह एक सच्ची कहानी है, जो कश्मीरी पंडित समुदाय के कश्मीर नरसंहार की पहली पीढ़ी के पीड़ितों के वीडियो इंटरव्यू पर आधारित है!


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